पोखरी छ, पानी छैन, शारीर छ, जवानी छैन, मौन रहन देऊ शब्दहरु घटना छ, कहानी छैन, बितेका त्यी एतिहंस को समझाना छ, निसानी छैन, बालुवामा महल बनाउने अनुभन छ, बनी छैन, सूत तिमी सूत, भर्खर त मिर्मिरे छ , बिहानी छैन, निंद्रा पनी लागोस कसरी बिस्तरा छ, सिरानी छैन……..
Baburam thapa





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